क्या स्मॉग स्वछता अभियान का हिस्सा नहीं ?
श्रीगंगानगर 19 अक्टूबर पिछले कई वर्षों से देखने में आ रहा है कि दिल्ली से सटती अन्य राज्यों में किसानों द्वारा जलाई जा रही फसलों के अवशेष से पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है ,यही नहीं दिल्ली में प्रदुषण का स्तर इस कदर बढ़ रहा है की वहां के लोगों को सांस लेने में ,रोजमर्रा के कामों के लिए आवागमन में दिक्कत आ रही है | पिछले वर्ष दिल्ली में आप सरकार ने तो फब्बारे से कृत्रिम बारिश कर आस पास के वातावरण को साफ़ करने का दावा किया था | देश भर में शोचालय और सफाई अभियान का सेहरा प्रधानमंत्री और केंद्रशासित बीजेपी सरकार अपने सर लेकर वाहवाही लूट रही है,जबकि शौंचालय निर्माण का भुगतान राजस्थान के सरदारपुरा बीका में तो अबतक नहीं हुआ है जिसके लिए राजकुमारी अभी तक दर दर भटक रही है , जिसके लिए उन्होंने करोङो के बजट को प्रचार प्रसार में स्वाहा कर दिया है ,स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने तो लगभग 4400 करोड़ रूपए बीजेपी के प्रचार प्रसार में ही खर्च कर दिए हैं ,जो जयपुर की करोड़ों रूपए की रैलियों के खर्च से हटकर हैं | किसानो की समस्या 70 वर्षीय वहीँ की वहीँ खड़ी है | नमामि गंगे प्रोजेक्ट व राजस्थान राज्य के पंजाब से आने वाले दूषित जल,नदी जो बॉर्डर और राजस्थान के लोगों के लिए जीवनदायनी है ,जस के तस खड़े वादों के पूरे होने की बाट जो रही है | पर इन चार सालों में केंद्र सरकार के पास क्या दूरदृष्टि का अभाव रहा है की वे साल दर साल होने वाली इस आपदा से अनभिज्ञ रहे हो ? जबकि दिल्ली से लगते लगभग सभी राज्यों में उनकी ही बीजेपी सरकार रहीं है | पराली को जलने से रोकने के हरसंभव प्रयास व केंद्रीय बजट की उपलब्धता कोई असंभव प्रतीत नहीं होते से लगते हैं ,अगर कुछ कमी रह गयी है तो सकारात्मक सोच और प्रयासों की........ वैसे भी अब कानून बनाना तो बस के बाहर नहीं था |
श्रीगंगानगर 19 अक्टूबर पिछले कई वर्षों से देखने में आ रहा है कि दिल्ली से सटती अन्य राज्यों में किसानों द्वारा जलाई जा रही फसलों के अवशेष से पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है ,यही नहीं दिल्ली में प्रदुषण का स्तर इस कदर बढ़ रहा है की वहां के लोगों को सांस लेने में ,रोजमर्रा के कामों के लिए आवागमन में दिक्कत आ रही है | पिछले वर्ष दिल्ली में आप सरकार ने तो फब्बारे से कृत्रिम बारिश कर आस पास के वातावरण को साफ़ करने का दावा किया था | देश भर में शोचालय और सफाई अभियान का सेहरा प्रधानमंत्री और केंद्रशासित बीजेपी सरकार अपने सर लेकर वाहवाही लूट रही है,जबकि शौंचालय निर्माण का भुगतान राजस्थान के सरदारपुरा बीका में तो अबतक नहीं हुआ है जिसके लिए राजकुमारी अभी तक दर दर भटक रही है , जिसके लिए उन्होंने करोङो के बजट को प्रचार प्रसार में स्वाहा कर दिया है ,स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने तो लगभग 4400 करोड़ रूपए बीजेपी के प्रचार प्रसार में ही खर्च कर दिए हैं ,जो जयपुर की करोड़ों रूपए की रैलियों के खर्च से हटकर हैं | किसानो की समस्या 70 वर्षीय वहीँ की वहीँ खड़ी है | नमामि गंगे प्रोजेक्ट व राजस्थान राज्य के पंजाब से आने वाले दूषित जल,नदी जो बॉर्डर और राजस्थान के लोगों के लिए जीवनदायनी है ,जस के तस खड़े वादों के पूरे होने की बाट जो रही है | पर इन चार सालों में केंद्र सरकार के पास क्या दूरदृष्टि का अभाव रहा है की वे साल दर साल होने वाली इस आपदा से अनभिज्ञ रहे हो ? जबकि दिल्ली से लगते लगभग सभी राज्यों में उनकी ही बीजेपी सरकार रहीं है | पराली को जलने से रोकने के हरसंभव प्रयास व केंद्रीय बजट की उपलब्धता कोई असंभव प्रतीत नहीं होते से लगते हैं ,अगर कुछ कमी रह गयी है तो सकारात्मक सोच और प्रयासों की........ वैसे भी अब कानून बनाना तो बस के बाहर नहीं था |



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