हनुमानगढ़ 10 अक्टूबर टाऊन की नगर परिषद रंगमंच पर श्री रामलीला समिति द्वारा आयोजित श्रीरामलीला के पांचवें दिन कन्यादान, सीता विदाई नाटक का मंचन किया गया। रामलीला के आरम्भ में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन कि झांकि दिखाई गई। झांकि में आरती भंवरलाल जिन्दल टिब्बीवाला द्वारा सपरिवार किया गया व आरती के बाद सीता के कन्यादान कि रस्म निभाई गई । कन्यादान में भंवरलाल जिन्दल टिब्बीवाला द्वारा सपरिवार ने कन्या के विवाह में जो दान के रूप में सामान(गहने,कपड़े,सुहाग का सामान) भेंट कर श्रीराम के हाथो में सीता का हाथ देकर कन्या दान किया । कन्यादान के पश्चात बारात कि आवभगत कि गई और बाद में विदाई का दृश्य दिखाया गया । समिति सचिव दिनेश तलवाड़ीया ने बताया कि श्री रामलीला समिति द्वारा हर वर्ष एक नये ढंग से कुछ नया दिखाने कि लालसा रहती जिससे कि मर्यादा पुरूषोतम राम का जीवन लोगो को रामलीला के माध्यम से दिखाया जाये ताकि लोग रामायाण से जीवन का सार सिख सके। उन्होने बताया यह रामलीला निर्देशक प्रेम रत्तन पारीक व गिरीराज शर्मा के नेतृत्तव में खेली जा रही है, समिति अध्यक्ष बालकृष्ण गोल्याण ने बताया इस वर्ष भी एक चॉदी के सिक्के से प्रतिदिन झांकि का तिलक सिक्के से किया जायेगा जिसके पश्चात पूजन होगा, लगातार 15 दिनों तक सभी देवी देवताओं की झांकियों का तिलक चॉदी के सिक्के से किया जायेगा और वही सिक्का लॉटरी द्वारा 20 अक्टूबर को रात्रि 12 बजे श्रीराम के हाथों से लक्की ड्रा निकाला जायेगा और जिसके भाग्य में सिक्का होगा भगवान श्रीराम उसे यह सिक्का अपने हाथों से देगे।
प्रिय मित्र बोलो, सरकार अपने कार्यालय के 4 साल पूरे कर चुकी है ,5 बजट प्रस्तुत कर चुकी है और उपलब्ध अवसरों को इस्तेमाल कर चुकी है अपनेअपने परिणाम दिखाने के लिए। ( यह पत्र पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अपने लोक सभा साथियों और देशवासियों को लिखा है जिसमे उन्होंने देश की विभिन्न स्थितियों जिनसे पिछले चार सालों में देश बीजेपी सरकार के कार्यकाल में 2014 से 2018 में गुजरा है उनके द्वारा जो मह्सूस किया गया है का वर्णन है जो केंद्र सरकार के कामकाज और नीतिओं पर सवाल उठाता है ये लेख 17 अप्रैल,2018 में एक अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में भी प्रकाशित हुआ था पर अंग्रेजी में ) मैं नहीं जानता कि आप में से कितने लोगों को अगले लोकसभा चुनावों के टिकट मिलेगी, अगर अनुभव की बात करें तो आप में से आधे लोगों को भी नहीं मिलेगी:यशवंत सिन्हा हमने 2014 के लोकसभा इलेक्शंस में जीत के लिए बहुत कठोर परिश्रम किया है हम में से कुछ लोग यूपीए गवर्नमेंट के साशन के सामने संघर्ष करते रहे हैं संसद में और बाहर भी | जब से जब से वह सन 2004 में सत्ता में आई है जबक...
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